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रविवार, 5 मार्च 2017

केदारनाथ यात्रा – पहिला दिन: दिल्ली से सोनप्रयाग

पिछला मई के बात हS, खलिहा बइठल रहनी तले एक दिन अखबार में केदारनाथ के कपाट खुले के खबर पढ़नी। सोचनी जे ए बेरा कवनो काम धाम त बा ना, त चल के दर्शन क लियाव ना त एक हाली वीजा आ गइल त फेर एकहक दिन गन के छुट्टी मिली। आ फेर हो भइल दर्शन। संघतिया भेंटाइल सिटुआ (हमार ममियाउत भाई)। ऊ कबो हिमालय में ना गइल रहे। कहनी चल तोके हिमालय देखा के ले आवSतानी। प्रोगराम बन गइल बाकिर एन टाइम पर मलिकाइन कइ गो छोट मोट काम गिना के लत्ती लगा देहली। हमरो मेहरारू के खिसियवा के जाए के बिचार ना रहे एसे जतरा दू दिन आगे बढ़ा देहनी जे काम निपटा के चल जाएब। जब फेर जाए के बेरा आइल त फेर चार गो नया काम बता देहली। एब त बरल खीस। चार गो कड़ेरे सुना के झोरा झंटा उठवनी आ चल देहनी। मामिला गरमात देख के सिटुआ ई मान के कि आजुओ जतरा ना होई, अपना रूम पर भाग गइल रहे। ओके फोन क के बोलSवीं। बिचार ई बनल रहुवे कि सांझी की छव बजे वाला पसिंजर से हरिद्वार जाइल जाई जवन तीन बजे भोर में पहुँचाई। आ ओजी से भोरे में बस ध लिहल जाई। ई कइला पर ट्रेन में सुत लेतीं जा। बाकिर झगरा झुगरी में ट्रेन के टाइम बीत गउवे। एसे स्टेशन गइबे ना करवीं जा, आ बस धरे सिटी सेंटर बस स्टेंड पहुँचवीं जा।

आधा घंटा में बस चल देहुवे आ बिना कवनो बिशेष घटना के साढ़े बारS ले हरिद्वार पहुँच गवीं जा। अब बस त पाँच बजे खुलित। तबले का कईल जाव! तीन चार घंटा खातिर होटल लिहल त बउकाही कहाइत। त तय ई भउवे कि रेलवे स्टेशन पर समय बिता लिहल जाव। चार्जिंग प्वाइंट खोज के फोन चार्जिंग में लगा के ओठंग गवीं जा। सिटुवा हमसे तनी दूर ओठंगS रहुवे काहे से कि ओकर चार्जिंग प्वाईंट दूर रहुवे। थोड़ देर में एगो पुलिस वाला आ के ओकरा से पूछ-ताछ करे लगुवे। तलाशी लेबे लगुवे। तले हम उठ के लगे अवीं आ पुलिसवा से पुछवीं जे का परेशानी बा। त ऊ हमसे एतने पुछुवे कि ई रउरी संगे बा का। हमरा सकार लेहला पर ऊ चल गउवे।
सबेरे करीब पाँच बजे जा के बस में बईठ गवीं जा। जल्दिये सवारी फुल हो गउवे। तले एगो बूढ़ पालीथीन के रेनकोट बेंचत लउकुवे। ऊ देख के मन परुवे की झगरा झुगरी में रेनकोट लेबे के त भुलाइए गइल बानी। बिस बिस रुपिया के दू गो ले लेहवीं काहे से कि पहाड़ की बरखा के कवनो भरोसा ना ह कि कब होखे लागी। छव बजे की करीब बस खुलुवे। हरिद्वार ऋषिकेश निकलत बस नेशनल हाइवे नंबर 7 ध लेहुवे।

कुछ आगे जा के नाश्ता-पानी खातिर बस एगो ढाबा पर रुकुवे। दुनू भाई दू दू गो आलू के फरवठा दबवीं जा। बस देवप्रयाग-श्रीनगर होत चार बजे ले रुद्रप्रयाग पहुँचुवे। देव प्रयाग में अलकनंदा आ भागीरथी के संगम बा। एहीजी ले आगे गंगाजी कहल जाला। जेकरा गंगोत्री जाए के होला उ एजी से भागीरथी घाटी वाला रास्ता ध लेला आ जेकरा रुद्रप्रयाग की ओर (बद्रीनाथ-केदारनाथ) जाए के होला उ अलकनंदा घाटी में बढ़ेला। रुद्रप्रयाग में एक दर्जन केरा लियउवे आ बस में चाँपल गउवे। करीब पाँच-साढ़े पाँच ले बस हमनी के सोन प्रयाग में उतार देहुवे। पहिले बस-गाड़ी गौरी कुंड ले जात रहली सन बाकिर बाढ़ की बाद सभ गाड़ी 7-8 कीलोमीटर पहिलही सोनेप्रयाग में रोका जाता। एजी से गौरी कुंड ले सरकारी कांट्रेक्ट वाला गाड़ी बाड़ीसन जवनन के किराया बीस रु. सवारी फिक्स बा।

सोनप्रयाग में ऊ भीड़ जे का कहल जाव। मेडिकल चेकअप आ यात्रा पर्ची बनवावे खातिर भयंकर लाइन लागल रहुवे। मेडिकल चेक-अप 60 साल से उपर की आदमी खातिर जरूरी रहुवे। लाइन में लाग के केहू तरे खिड़की ले पहुँचवीं जा। ओजी पर्ची खातिर आइडी प्रूफ मांगे लगुवे जवन हम लेके गइले ना रहवीं। कहला सुनला पर सिटुआ की आइडी पर दूगो पर्ची बना देहुवे। सोचवीं जा कि आज गौरीकुंड ले चल चलल जाव आ होत फजीरे चढाई शुरू क दीहल जाई बाकिर पुलिस ई कहि के कि उपर ढेर आदमी चल गइल बा, गेटे बन क देहुवे। अव सोनप्रयाग में सभ होटल फुल। हमनी का परेशान। दू-तीन किलोमीटर पीछे अइला पर एगो होटल भेंटउवे। उहो 1200 से कम में देबे तइयार ना होत रहुवे। केतना कहला सुनला पर हजार में मनुवे।बिचार बनुवे कि एब्बे खा ओ के सुत रहेके आ सबेरे चारे बजे होटल छोड़ दीहल जाई। अब सांझ की बेरा कहीं सुध खाना ना भेंटउवे। मैगिये खा के सुते के परुवे।


सोनप्रयाग

सोनप्रयाग

सोनप्रयाग

मंगलवार, 17 जनवरी 2017

वैष्णो देवी दर्शन, जम्मू यात्रा : पाँचवाँ दिन

अगिला दिने बिहाने सात बजे जगवीं। तइयार हो के निकलवीं आ पहुँचवीं बस स्टैंड चौराहा। ओजी पर्ची काउंटर बा जहाँ यात्रा खातिर पर्ची कटेला। एकरी बिना बाणगंगा चेक पोस्ट से आगे ना जाए दिहल जाला। अब एगो पर्ची काउंटर रेलवे स्टेशनो पर खुल गइल बा कि आदमी ट्रेन से उतरते पर्ची ले लेव। पर्ची ले के भाई साहब के फोन करवीं त उहाँका हमार नाम सीआरपीएफ गेस्ट में लिखवा देहवीं जवना से दर्शन खातिर लाईन में ना लागे के परो। ओजी से आटो पकड़ के बाणगंगा चेक पोस्ट पहुँचवीं। हमरी ल समान की नाम पर खाली कैमरा आ दूरबीन रहुवे। चेकिंग में पता चलुवे की दूरबीन ले गइल माना बा। ओके लाकर रूम में जामा करवावे के परूवे। चेक पोस्ट से निकलते एक किनारे लंगर लागS रहुवे। कढ़ी रोटी आ राजमा चावल दाब के खवीं। बाकिर जुता जमा करे
वाला बीस रुपिया ले लेहुवे। मने सट पट बराबर हो गउवे।  आगे बढ़के बाणगंगा पुल पार करवीं। ओजी बढिया नहाए के बेवस्था रहुवे। बाकिर हमरा ओसे का मतलब रहुवे। बन में बेल पाकल कउवा की कवना काम के! आगे बढ़वीं त लाइने से हजाम के दोकान रहवीसन। आस पास के लोग लइकन के मूड़न करावे ओहीजी ले जाला। अब चढ़ाई शुरू भउवे। चुंकी हम तुंगनाथ के चक्कर लगा आइल रहवीं एसे ओइसने चढ़ाई के आसरा रहुवे बाकिर इ त ओकरी मुकाबले कुछु ना रहुवे। बढ़िया रास्ता, ओपर धS के चले खातिर रेलिंग। बीचो में रेलिंग कि पैदलहा आ घोड़हा अलगे अलगे चलो। ओपर से दुनू ओर दोकाने दोकान। तनी आगे बढ़ला पर गीता मंदिर मिलुवे। ओसे तनी आगे बढ़वीं त देखSतानी की एहूजी कैफे काफी डे खुलल बा। मने हद बा। घोड़वा आला बहुत बदमास बाड़सन। बुझाला कि घोड़वन के पैदल लो कि देहिये पर चढ़ा दीहS सन। बारह एक बजे ले अर्धकुमारी पहुँचवीं।
अर्धकुमारी से माता भवन ले जाए के दू गो रास्ता बा। एगो भैरो स्थान हो के आ एगो डाइरेक्ट। हम डाइरेक्ट वाला पकड़वीं काहे से कि इ छोट बा। एजी से आगे फरदांव हो गउवे काहे से कि ए रास्ता पर खच्चर- घोड़ा माना बा। ओकनी खातिर भैरो स्थान वाला रास्ता बा। एजी से चढ़ाइयो तनी कमे बा। डेगारे बढ़वीं आ पाँच बजे ले भवन पहुँच गवीं।

ओजी सीआरपीएफ आफिस में रिपोर्ट करवीं। ओजी समान ओमान ध के दर्शन करे गवीं। आराम से दर्शन हो गउवे। जब वापसी खातिर निकलवीं क बरियार भूख लागल रहुवे। सागर रत्ना में जा के एगो रवा डोसा खवीं आ ओकरी बाद वापसी शुरू क देहवीं आ डेगारे बढ़ के साढ़े सात ले अर्धकुमारी। ओजी थोड़ देर आराम क के आगे बढ गवीं। बाण गंगा से अर्धकुमारी ले रास्ता की अलावा जगहि जगहि सीढ़ियो बनल बा। चढ़त में त दुइये जगहि सीढ़ी धइला में सांस फूले लगुवे बाकिर उतरत में सीढ़ी के भरपूर इसतेमाल करवीं। नव की लम सम ले बाणगंगा पहुँच गवीं। ओजी टेम्पू वाला अति कइले रहुवSसन। साला दू कीलोमीटर के पचास रूपिया सवारी! आ उहो ठूस के! रीजरब अढ़ाई स में! हमहूँ कहवीं की जेंगान बत्तिस कीमी चलनी हँ ओंगान चौंतीसो चलल जा सकेला आ पैदले तान देहवीं आ थोड़ देर में बस स्टैंड चौराहा पर पहूँच गवीं। पिछला रात की खराब खाना से दिमाग खराब रहुवे एसे एगो नीमन रेस्टोरेंट में चाउमीन खवीं जवन की ठीक ठाक रहुवे। फेर होटल रूम में आके बिछवना ध लेहवीं।

अगिला दिने देरी से सुत के उठवीं बस ध के उधमपुर चल गवीं काहे से कि लंच में मीट खाएके मन रहुवे। बढ़िया यखनी आ रोटी खा के मजा आ गउवे। बजार में से दू किलो अखरोट लेहवीं आ स्टेशन आ गवीं। सम्पर्क क्रांति में टीकठ रहबे करुवे, आराम से बिहाने बिहाने दिल्ली ध लेहवीं।
इति जम्मू-काश्मीर यात्रा संपूर्णं।
बाणगंगा चेकपोस्ट

लंगर खातिर जुता चप्पल जमा करेके स्टाल


कटरा शहर



भवन के पहिला झलक

डौन्ट बी ए बंदर, टेस्ट द थंडर

ई लो कहीं ना मानी लो

भवन



ई क्हें डलनी हँ, नीचे से दूसरा लाइन देखल जाव

बुधवार, 28 दिसंबर 2016

अनंतनाग से कटरा, जम्मू - काश्मीर यात्रा : चउथा दिन

पहिला ट्रेन पकड़े के प्लान आज सफल हो गउवे आ दस बजे ले बनिहाल पहुँच गवीं। ओजी से उधमपुर के सवारी कवनो टेक्सी वाला ना बइठावत रहुवsसन। सभ जम्मू! एगो बइठावहूँ के तइयार भउवे त एह सर्त पर कि किराया जम्मू के देबे के परी। हम कहवीं भगबs कि ना! खीस बरूवे त जा के बस में बइठ गवीं। ओहू में एतना भीड़ कि का कहे के। हमके सीट मिल गइल एगो चमत्कारे रहुवे। ऊपर से एक नम्मर के बदमाश कंडक्टर। केहू तरे बस चलूवे। जब कंडंक्टर किराया लेबे हमरी ल अउवे त हम पान स के नोट धरा देहवीं आ उ टीकठ की संगे पता ना कवना झोंका में दू स अधिका फेर देहुवे। जेनरली अइसन भइला पर हम पइसा वापस क देनी बाकिर सारे कंडक्टरवा पर जीउ जरs रहुवे एसे चुप चाप धs लेहवीं। रास्ता में एक जगहि नाश्ता पानी खातिर बस रुकुवे आ दू बजे ले उधमपुर उतार देहुवे।

उतर के कुछु खाए की फेर में परवीं। ओजी एक्के गो दोकान रहुवे जवना में बईठ के अपना मनपसंद चीझ समोसा के आडर देहवीं। आतना ना घटिया समोसा देहुवे की का कहल जाव। हमार त जीउवे झनझना गउवे। एक काटा से ढेर ना खाइल गउवे। मूँह बना के बहरी आ गवीं आ कटरा की बस के इंतजार करे लगवीं। बसओ मुआ के ध देहुवे। पहिले त घंटा भर इंतजार करा के अउवे, आ अइबो करुवे त एतना भरल की चढ़लो मुश्किल! केहू तरे आधा दूर खड़े खड़े गवीं। ओकरी बाद जाके सीट भेंटउवे। कटरा पहुँचत पहुँचत पाँच से ऊपर हो गइल रहुवे।

अब होटल खोजल चालू करवीं। एक त कवनो की ल सिंगल रूम ना रहुवे आ डबल रूम 6-7 स की नीचे देत ना रहुवsसन। कइ होटल घुमला की बाद एगो तीन स में रूम देबे के तइयार भउवे। जा के हाथ मूँह धो के खाना खाए निकलवीं। कुल्ह कटरा जोहि देहवीं बाकिर कहीं मुर्गा ना मिलुवे। मन मार के एक जगहि शाकाहारी खाए बइठवीं। खाना कवनो गत के ना रहुुवे। केहू तरे दू रोटी घोंटवीं आ रूम में जा के सुत रहवीं। यात्रा के ई सबसे खराब दिन गुजरूवे। आज कथिके फोटो डालल जाव...........


बुधवार, 28 सितंबर 2016

पहलगाम आ अनंतनाग, कश्मीर यात्रा तिसरका दिन

सबेरे फेर उठे में देर हो गइल आ पहिला ट्रेन छूट गइल। दूसरकी ट्रेन पकड़ के अनंतनाग पहुँचवीं। पहुँचत पहुँचत एगारS बज गउए। तुरंते सूमो पकड़ के शहर की भीतर बस स्टैंड पहुँचवीं। भूख लाग गइल रहुवे एसे एगो ठीक ठाक होटल देख के खाए बइठवीं। साला खाना कवनो गत के ना रहुवे आ महंगा अतना की पूछS मत। एक प्लेट यखनी के 280 रुपिया ले लेहुवे। बस स्देंड पर की खाना के हमार अनुभव कहीं आ कबो ठीक नईखे रहल। खाना खा के पहलगाम के सूमो पकड़वीं। रास्ता लिद्दर नदी की किनारे किनारे बा। जब पहलगाम नियराईल त सड़की पर बरफ मिले लागल। जब पहलगाम में उतरवीं त चारूओर बरफे बरफ। उतरते एगो टट्टू वाला पीछे परल। ओकरा से मुश्किल से पीछा छोड़ा के एटीएम खोजवीं आ पइसा निकलवीं। वापस स्टैंड पर आवते फेर उहे पीछे पर गउवे। साफ माना क देहवीं त गिलगिलाए लगुवे की आप सीजन चलSता आ ओकर नम्मर पाँच दिन बाद आइल बा आ अगर हम ओके हायर ना करब त ओकरा फेरू पाँच-छव दिन इंतजार करे के परी। अब हम मुश्किल में पर गवीं कि अब ए इमोशमल ब्लैकमेल के का करीं, अंत में कहवीं कि चलS आज ब्लैकमेल होईए जाइल जाव काहे से की बरफ की वजह से कवनो गाड़ी वाला चंदनवाड़ी आ बेताबघाटी ना जात रहुवSसन। पुछवीं कहाँ ले चलबे त कहSता मिनी स्विटजरलैंड देखा दे तानी। हम कहवीं की सीधा बात कर तब जगहि के नाम बतउवे बैसारन। बैसारन पहलगाम से तीन चार कीलोमीटर बा। चार स में बात फाईनल भउवे। जिनगी में कबो घोड़ा पर चढ़ल ना रहवीं एसे चढ़ते में हमार चोन्हा फुला गउवे।  खैर, घोड़ा पर शुरू में त गिरला की डरे कचकचा के जीन धS के बइठल रहनी बाकिर धीरे धीरे डर कम हो गउवे आ एक हाथे फोटउवो घींचे लगवीं। बाकिर हील डोल की वजह से फोटो नीमन ना आ पावत रहुवे। चारू ओर हर समान पर बरफे बरफ रहुवे। खाली पेड़न पर बरफ ना रहुवे। रास्ता में दु तीन जगहि व्यू प्वाइंट रहुवे जहाँ रुक के टट्टू पर बइठले बइठले फोटो घिंचउवे।ओजी से पहलगाम त बहुत सुंदर लागत रहुवे बाकिर भयंकर बदरी की वजह से पहाड़ के एक्को चोटी ना लउकत रहवीं सन। मौसम नीमन रहला पर गजबे सुन्दर लागित। रास्ता एकदम कानो कानो भईल रहुवे। कबो कबो त बुझात रहुवे की कहीं घोड़वे ना बिछिला के गिर जाव। करीब आधा घंटा में बैसारन पहुँच गवीं जा। उहो का रहुवे? खाली एगो ढालू विशाल मैदान जवन बरफ गिरला की वजह से सुंदर लागत रहुवे। तनी तनी बरखा होत रहुवे, एसे बड़का कैमरा निकाले में डर लागत रहुवे। छोटके से फोटो लेबे लगवीं। तले संजोग से झीसी होत होत बरफबारी होखे लगुवे। हमरा त मजा आ गउवे। बड़का कैमरा निकलवीं आ मजा लेत फोटो लेबे लगवीं। ओजी करीब घंटा भर रुकला की बाद वापसी शुरू भउवे। चढ़ला ले उतरलका ढेर खतरनाक रहुवे। रास्ता भर पीछे महें तन के बइठे के परुवे।
पहलगाम पहुँचला की बाद तनी मारकेट घुमवीं बाकिर कुछु खास ना लगुवे। रोड पर से उतर के नदी की तीरे चल गवीं। ओजी थोड़ देर घुमवीं ओकरी बाद आ के अनंतनाग खातिर गाड़ी पकड़ लेहवीं। अनंतनाग पहुँच के तीन स में एगो रूम लेहवीं आ समान ध के बजार में निकल गवीं। एजी बजार पहलगाम ले नीमन रहुवे। तीन किलो अखरोट आ एक गराम केसर लेहवीं। अब खाए खातिर होटल मिलते ना रहुवे। आठे बजे सभ बन हो गइल रहुवे। बड़ा मुस्किल से एक जगहि पूड़ी तरकारी मिलुवे। खा के होटल ध लेहवीं।
पहलगाम बस स्टैंड

वे टू मिनी स्विटजरलैंड



खच्चर पर से फोटो लियाई त हाथ त हिलबे करी



बैसारन (मिनी स्विटजरलैंड)





हमी हम हैं तो क्या गम है

हमार वाहन


पहलगाम शहर




ओह पार



p.s.- फ्रांस से बड़ा हिट आवता हो। जे बा ओके धन्यबाद बा।