शनिवार, 23 जुलाई 2016

दिल्ली से बारामूला, कश्मीर यात्रा : पहिला दिन

जनवरी के महीना रहे। नया नया DSLR किनले रहनी जवन खाली भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन में कामे आइल रहे! कही अइसन जगहि घूमे जाए के मन करत रहे जहाँ मन भर फोटो घिंचाव, बाकिर छव महीना से खलिहे बइठल रहनी एसे पइसा खरचा करे के हिम्मत ना परे! एही बीचे एक दिन दीदी सलाह देहली वैष्णो देवी जाएके। मलिकाइन जाए की अवस्था में ना रहली एसे अकेलही जाए के प्रोगराम बनल। फेर सोचनी कि जब वैष्णो देवी जातानी त एही लगले कश्मीरो धांग दिहल जाव! अब समस्या भईल टीकठ के। सभ टरेन फुल। फारेन टूरिस्ट कोटा में सीट खाली रहे बाकिर हमार रेजीडेंट कार्ड एक्सपाएर हो गईल रहे। कहनी चलs एक हाली ट्राई मारल जाव। पासपोर्ट ले लेहनी आ रेजीडेंट कार्ड घरवे छोड देहनी। नई दिल्ली फारेन टूरिस्ट ब्यूरो मे जाके टोकन ले के बईठ गइनी। जब नंबर आइल त क्लर्क वीजा भा रेजीडेंट कार्ड मंगलस। कहनी नइखीं ले आइल त बडा रिक झिक कइलस। अंत में कहलस की ह्वाट्सएप पर मंगा द। हम खाली आगे वाला पेज मंगा के देखा दहनी (एक्सपायरी डेटवा पीछे रहे) आ टीकठ मिल गईल। कहनी की चलs एगो त काम निपटल। अब जाए की दिने मलिकाइन मछरी बनवली। खा ओ के निकले की बेरा खाना पैको क देहली। स्टेशन पहुँच के उत्तर संपर्क क्रांति में आपन बर्थ पकडनी। पूरा ट्रेन भक्तिमय रहे! लोग भर भर मूँहे गुटका ले के पीक गिरे से बचावे खातिर मुँह उँट खान उपर महें क के 'जय माता दी! जय माता दी!' कहत ना थाकत रहे। अइसन भक्तिमय माहौल में मछरी खाइल नीमन ना लागित एसे डब्बा खोलबे ना कइनी आ सुत रहनी। सबेरे जम्मू में आँख खुलल आ आठ बजे ले उधमपुर पहुँच गइनी। ओजी स्टेशन से बहरा निकलनी त सुनसान। बस दु चार गो फौजी गाडी जवन कवनो अफसर के लेबे आइल रहे। आस पास ना कवनो मकान ना दोकान। जम्मू काश्मीर से ई हमार पहिला परिचय रहे। स्टेशन से बहरा.निकलनी त दु चार गो एस यू वी टैक्सी खडा रहली सन। एगो की लगे एगो सरदार खडा हो के बानिहाल - श्रीनगर के आवाज लगावत रहे। औकरा से  बानिहाल के किराया पुछनीं त पाँच स बतवलस। हमरा ढेर बुझाइल एसे ओमें ना बइठ के बस स्टैंड जाए खातिर बस ध लेहनी। अबे अधे दूर गइनी जा तले एगो बसवा रोकवा के भीतरी घुसल आ बानिहाल बानिहाल चिलाए लागल। किराया पूछनी त तीन स बतवलस। तुरंते उतर के ओकरी इनोवा में बईठ गइनी। चार आदमी पहिले से बइठल रहे! ड्राइबर गाडी स्टार्ट कइलस, बस स्टैंड के चक्कर लगा के सवारी बइठवलस आ चल देहलस। तनी सा आगे गइला पर बरफ वाला चोटी लउके लागल। आगे गइला पर एक जगहि चाय नाश्ता खातिर रुकल गईल। हम चाय त ना पीयेनी बाकिर ललछाहूँ नमकीन चाय देख के टेस्ट करे खातिर ले लेहनी। ठीके ठाक लागल। ओजी से तावी नदी की तीरे तीरे आगे बढनी जा। आगे जाके तावी नदी छूट गईल आ गाडी चढाई चढे लागल! ओकरी बाद गाडी कुद नाव की गाँव में रुकल जवन ओने अपनी मिठाई खातिर मशहूर ह। ओजी से आगे बढनी जा त पहुँचनी जा पटनी टाप! ओजी पूरा बादरे बादर रहे! पटनी टाप हेलते उतराई चालू हो गईल आ तनी आगे बढते चिनाब नदी मिल गईल। चिनाब की तीरे तीरे आगे बढनी जा। ड्राइबर रामबन में खाए के कहे लगुवे त हमनी का मने क देहवीं जा की कहीं खाए की फेरा में बनिहाल से तीन बजे वाली ट्रेन ना छूट जाव। बाकिर उ कहे लगुवे कि हम ट्रेन पकडा देब खाना खा लिहल जाव त सभे मान गउवे। होटल सस्ते रहुवे हमहूँ मीट भात चाँप लेहवीं। खा के आगे बढते गाडी पेन्चर हो गउवे। अब सभे डराइबर पर कुडबुडाए लगुवे। बेचारा हाली हाली चक्का बदल के गाडी भगउवे। बाकिर हाय रे किस्मत! बानिहाल से दस कीलोमीटर पहिले फेर पेंचर। अब डराइबरो हाथ उठा देहुवे। अब रोड किनारे खडा हो के साधन खोजे लगवीं जा। एगो टैम्पो ट्रैवेलर वाला मिलुवे जवन बानिहाल स्टेशन ले आ के छोड देहुवे। सबसे खराब किस्मत ई की ट्रेन सामने से निकल गउवे। अब अगिला ट्रेन एक घंटा बाद रहुवे। स्टेशने पर घूमत टाइम पास करे लगवीं। तले मन परुवे रात के रोटी मछरी बैग में परल बा! सोचवीं खराब त होइए गईल होई बिग दे तानी। रोटिया त पापड हो गई रहुवे बाकिर मछरिया अबे नीमन रहुवे। स्टेशनीए पर मछरी सधsवीं तले ट्रेन आ गउवे। टीकठ ले के बइठ गवीं। बानिहाल की बाद एगो सुरंग बा जवन भारत के सबसे लंबा रेलवे सुरंग ह। ओकरी बाद हिलर शाह आबाद स्टेशन बा जवन कश्मीर के सबसे उँच स्टेशन हs। ओंघी लागत रहुवे एसे बइठले बइठल झप गवीं आ जब जगवीं त अन्हार हो गईल रहुवे आ ट्रेन श्रीनगर पहुँच गइल रहुवे। हमरा बारामूला जाएके रहुवे जवन कि कश्मीर के आखिरी स्टेशन ह। आठ बजे की लगभग ट्रेन बारामूला पहुँचुवे। स्टेशन की बहरा निकल के अपना मित्र-मेजबान वसीम भट्ट के फोन करवीं त कहुवन की पाँच मिनट में पहुँचतानी। हम ईंतजार में एक ओर खड़ा हो गवीं। आर पी एफ वाला लो स्टेशन बन क के घरे जाए के तइयारी करत रहुवे लो। हमके खडा देखुवे लो त आ के पूछताछ करेे लगुवे लो। बतवला पर जले वसीम आ ना गउवन तले सभ जाना ओहीजी खडा रहुवे लो। वसीम की घरे सबसे परिचय भउवे भयंकर थाक गइल रहवीं एसे  खाना खा के रजाई में ढुक गवीं।
कुद गाँव

बरफ के पहिला दर्शन

बानिहाल स्टेशन

स्टेशन से पहाड़ के नजारा

स्टेशन

मंगलवार, 12 जुलाई 2016

पोखरा से गाँवें, नेपाल यात्रा : आखिरी दिन

अब आज केहू तरे गोरखपुर पहुँचे के प्रोग्राम रहे! सबेरे सबेरे शांति स्तूप देखे निकलवीं जा! ई फेवा ताल की ओ बगल एगो पहाडी की उपर बा! काफी उपर ले गाड़ी जाए के रास्ता बनल बा। ओकरी बाद तनी मनी पैदल चढे़ के परेला। 15-20 मानट मे पार्किंग में पहुँच के गाडी खडा क के चढाई शुरू क देहवीं जा। थोड़ देर में उपर स्तूप पर पहुँच गंवीं जा। ओजी से चारू ओर के नजारा जीउ हरिहरा देबे वाला रहुवे। एक इओर के घाटी पूरा बादर से भरs रहुवे! हमनी का बादरो से उपर खाडा हो के  ओके देखत रहवीं जा!स्तूप पूरा चटक उजर रंग के बा जवना के शिखर सोनहुली रंग के बा। ओकरी चारूऔर बड़हन बड़हन दियरखा बना के ओकनी में भगवान बुद्ध के अलग अलग मुद्रा में सोनहुली रंग के मुर्ति बनावल बा। जूता खोल के सीढी चढ़ला की बाद बात-चित आ हाल्ला गुल्ला एकदम माना बा। चुप चाप घूम के देखs आ मन करे त कही बईठ के ध्यान करs। स्तूप की पीछे से फेवा ताल आ पोखरा शहर खूब सुंदर लागत रहुए! आकाश में बदरी रहुए एसे अन्नपूर्णा चोटी आ पहाड़ ना लउकत रहुवे। बाद मे बादर तनी नीचे भउवे त उपरा से खाली अन्नपूर्णा माई की चोटी के दर्शन भउवे। देख ओख के नीचे उतरवीं जा त हमार विचार बटरफ्लाई म्यूजियम देखे के बनुवे। बाकिर परेशानी ई रहुवे की केहू का पते ना रहुवे कि ई बा कहाँ। गूगलो बाबा फेल रहुवन। ना होटल मालिक का पता रहुवे ना कवनो टैक्सी वाला बता पावत रहुवे! संयोग से एगो लडि़का हमके पूछत सुनुवे त आके बतउवे कि ई म्यूजियम ओकरी यूनिवर्सिटी कैंपस  की भीतर बा यानी प्रिथ्वी नारायण कैंपस की भीतर! ओकर असली नाम ओजी पहुँचला की बाद पता चलुवे। अन्नपूर्णा नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम! ई एगो छोटी चुकी चार कमरा के म्यूजियम बा जवन अपनी आकार की हिसाब से खूब भरल पुरल आ सजावल धजावल बा। घुसते पहिला हाल में अलग अलग पहाडी जानवरन के डिटेल बा, आगे एगो देवाल पर हर साइज के तितली मय क्लासिफिकेशन की संगे टांकल बाडी सन। एही से एके बटरफ्लाई म्यूजियम कहल जाला! दोसरा ओर दुनिया में कवना कवना उँचाई पर कवन कवन तरह के बकरी आ भेंड़ होलीसन एकर एगो खाका बनs रहे! हम त अचरज में पर गवीं की इहे एगो जानवर बाड़ी सन जवन दुनिया की हर कोना, हर मौसम आ हर उँचाई पर होलीसन! अगिला कमरा में भूसा भरल अलग अलग किसिम के जानवर धइल रहलsसन! नेउर, बदुरी, उल्लू, तोता, मैना एतना बढियाँ से धईल रहे कि बुझाव की अबे बोले लगिहसन! ओजी से निकलत निकलत 12 बज गईल रहुवे! ओजी से सीधा गोरखपुर के रास्ता धरवीं जा आ राती के आठ बजत बजत नौतनवा आ दस बजत बजत गोरखपुर राजाराम भाई की घरे पहुँच गँवीं जा! आ बिहाने बिहाने आदमी आपन घर ध लेहुवे।

                                             

बादरो से उपर



अन्नपूर्णा माई की चोटी के दर्शन


फेवा ताल आ पोखरा शहर

शांति स्तूप

अन्नपूर्णा नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम




अथ श्री नेपाल यात्रा कथा समाप्तिः

शनिवार, 23 अप्रैल 2016

पोखरा घुमाई, नेपाल यात्रा : पाँचवाँ दिन

आगिला दिने सबेरे जल्दी उठ गइनी जा। भोर की मुन्हारे में फेवा ताल की तीरे बालकनी में बईठ के काफी पीये के अापन अलगे मजा रहे। ओकरी बाद ताल की तीरे टहले निकलनी जा। तनी मली टहलला की बाद एगो नाई वाला हमनी के नाई पर घूमे के बोलावे लागल। हमहूँ कहनी की एही लगले वाराही देवी के दर्शनो क लीहल जाव। वाराही देवी के मंदिर फेवा ताल की बीच में बा। ओजी नाई की अलावे अउरा कवनो साधन से पहुँचला मान के नईखे। अईसे त मंदिर की लगे वाला घाट से नाइ के नीमन बेवस्था बा आ किरSयो कम बा, बाकिर हमनी का ओ घाटवा से बहुत दूर रहनी जा एसे तनी ढेर पइसा देबे के परल।  मंदिर ले पहुँचे में लगभग घंटा भर लागल। मंदिर लगभग चार बिगहा की टापू पर बनल बा। जा के देवी के दर्शन करवीं जा। बाहरा निकलला पर एक ओर लोग मछरिन के आटा खियावत रहुए। ई देख के हमार बेटी खुश हो गउवे। उहो खूब खुश हो हो खियवलस। ओजी से निकल के वापस होटल के रास्ता धरवीं जा। रास्ता में एगो बेकरी पर रुकवीं जा आ एगो डेनिश पैस्ट्री नाम के आइटम लेहवीं जा जवन बड़ा नीमन लगुए। लेकिन अफसोस कि ओकरी बाद ऊ कहीं ना भेंटाइल।

होटल आ के तइयार हो के डेवी फाल खातिर निकलवीं जा। डेवी फाल पृथ्वी चौक से गोरखपुर वाला रास्ता पर लगभग चार कीलोमीटर पर बा। फेवा ताल से एगो नदी निकलेले जवन खुबे पातर जगहि में ऊँचा से गिरेले। एकरी सुंदरता के बड़ा नाम सुनले रहनी एसे देखे के बड़ा मन रहे। बाकिर जब देखनी त मन थोर हो गईल। मलिकाईन आ बेटी का बड़ा पसन परल। ई हमरा बाद में बुझाइल कि एके देखला के मजा मानसून में आवेला जब एमें पानी एतना हहरा के गिरेला कि ओकर हल्ला एक कीलोमीटर दूर ले सुनाला। बाहरा निकलेवाला गेट पर एगो गड़हा में लक्ष्मी जी के मूर्ति बा जवन पानी में डूबल बा आ ओकरी चारू ओर रेलिंग लागल बा। ओजी लीखल बा की कुछु भाख के पानी में सिक्का फेंकला पर अगर सिक्का मुर्ती वाला चउतरा पर रुक गईल त भाखल पुज जाई। पाता ना ई सही बा कि ना बाकिर दु तीन हाली प्रेक्टिस की बाद हम सिक्का आराम से अटका देहनी।
 ओजी से निकलला पर रोड की दुसरी ओर गुप्तेश्वर महादेव के मंदिर बा। गुफा में उतरनी जा। कइ महाला नीचे उतरला की बाद शंकर जी की मंदिर पहुँचनी जा। ओजी से एक महाला उतरला की बाद गुफा के रहस्य पता चलुवे। डेवी फाल से  जवन पानी नीचे गिरेला ऊ एहीजी से आपन रास्ता बनावत निकलेला। झरना की रास्ता से आवत अंजोर नीमन लागत रहुवे। अब शुरू भउवे वापसी, चढत में सभके सांस फूले लगुवे। बेटी के गोदी में उठवले काँखत कूँखत बाहरा अवीं जा।

ओजी से बेगनाश ताल निकलवींजा। बेगनास ताल आ रूपा ताल अगले बगल बा। पोखरा से काठमांडू वाला रोड पर दस कीलोमीटर पर ताल चौक बा। ओजी से उत्तर ओर घूम गइला पर तीन कीलोमीटर पर बेगनास ताल बा ओकरी बाद सटले रूपा ताल बा। रास्ता में एक जगहि खाए रुकवीं जा। ताल के ताजा मछरी रोटी की संगे खाए में मजा आ गउवे।

बेगनास पर ढेर भीड़ भाड़ ना रहुवे। नाय 400 नेपाली रूपिया में दू घंटा खातिर मिल गउवे। सुंदरता जबरजस्त रहुवे, घाम भइल रहुवे, चारू ओर हरिहर जंगल आ ऊँच ऊँच पहाड़। चटक नीला आसमान में उजर उजर बादर छितराईल गजबे लागत रहुवे। दू घंटा पते ना चलल कब बीत गईल। लास्ट में देखवीं कुछ लोग जंगल में बईठ के बंसी लगा के मछरी मारत रहुवे। हमरो मारे के मन क देहुवे। सोचवीं तीरे की लगे वाला बजार से जोगाड़ कीन के आएब आ लगा के घंटा भर मारेब बाकिर भगवान का ई मंजूर ना रहे। तीरे उतरते बरखा चालू हो गउवे। भाग के गाड़ी में बइठे का परुवे। फेर रूपा ताल जाएके मन ना भउवे।

तीरे पर एगो जोगाड़ देखवीं जवन देख के बनावे वाला के सलाम ठोके के मन करुवे। एगो झुलुहा वाला चर्खी रहुवे जवना में ट्रांसमिशन खातिर गेयर की जगहि पर तीन गो पुरान गाड़ी के चक्का लागल रहुवे। आ ऊ बहुत बढ़िया काम करत रहुवे।

वापस आके खाना खवीं जा आ बिछवना में ढुक गवीं जा।
बिहाने बिहाने फेवा ताल की तीरे
वाराही देवी मंदिर
बिहाने के फेवा ताल
माई बेटी फेवा ताल में
डेवी फाल
भाखे वाला इनार

गुप्तेश्वर महादेव के सबसे नीचे वाला गुफा

चढ़त में थाकल बबुनी

बेगनास ताल में बबुनी के रो रो करावत

माई बेटी बेगनास ताल में

तीरे के जंगल

यू ब्यूटी

गेयर की जगहि चक्का के जोगाड़

गुरुवार, 14 जनवरी 2016

काठमांडू से पोखरा, नेपाल यात्रा : चउथा दिन

अगिला दिने सबेरे स्वयंभूनाथ खातिर निकलनी जा। त्रिभुवन राजपथ पर कलंकी चउराहा से रिंग रोड पर दहिने मुड़ला पर लगभग तीन किलोमीटर पर स्यंभू बस स्टेंड बा। ओजी से दहिना ओर एगो गली खानी रास्ता निकलल बा जावन कि ऊपर स्तूप पर ले गईल बा। स्वयंभूनाथ 1390 मीटर की ऊँचाई पर बा जबकि दरबार चौक लगभग 1300 मीटर पर बा।

जब हमनीका पहुँचवींजा त झीसी परत रहुवे जवना से मौसम अउर मस्त लागत रहुवे। सीढी से उपर पहुंचवीं जा जहाँ मेन स्तूप आ हारती देवी के मंदिर रहुवे। स्तूप आ मंदिर की हाता में चारूओर छोट छोट स्तूप आ मंदिर बनल रहुवे। जेने देखs स्तूप भा मंदिर। चुंकि ई जगहि शहर से ऊँच बा एसे एजी से पूरा काठमांडू शहर लउकेला। घाम ना भइल रहुए एसे फोटो त नीमन ना आवत रहुवे बाकिर ओजी से शहर निहारे में बहुत नीमन लागत रहुवे। ओजी बानर बहुत बाड़सन लेकिन बूनी परला की कारन सभ जगहि खोज खोज का लुकाईल रहुवS सन। घूम घाम के वापस कलंकी आके पोखरा जाए खातिर त्रिभुवन राजपथ पकड़ लेहवीं जा। एकर नाम आगे जा के पृथ्वी राजपथ हो जाला।

काठमांडू से पोखरा 210 किलोमीटर बा यानी पाँच छव घंटा के रास्ता। रुकत, नजारा लेत, फोटो घींचत आगे चल देहवीं जा। रास्ता में गजुरी में रुक के खाना खवीं जा। रास्ता की ठीक अधेआध में, यानी पोखरा से सौ किलोमीटर पहिले मनकामना देवी के मंदिर बा। मंदिर जाए खातिर केबल कार के बेवस्था बा। हमरा देखल केबल कारन में ई केबल कार सबसे बड़हन बा। ई लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लमहर बा आ आदमी के 265 मीटर से 1310 मीटर की ऊँचाई पर ले जाला, यानी 955 मीटर ऊँचा उठावेला। एकर दुनु ओर के किराया 500 नेपाली रुपया बा। ऊपर की गाँवन में रहे वाला लोकल लोग खातिर ई फ्री बा। केबल कार से त्रिशूली नदी आ ओकरी बगल में चीड़ के जंगल बहुत सुंन्दर लागत रहे। ऊपर गईला पर सभ कुछ ओइसने रहे जइसन कवनो मंदिर का आस पास होला। सेनुर, टिकुली, खेलवना, परसादी आ चाय नाश्ता के दोकान चारू ओर सजल रहे। मंदिर की पीछे की बालकनी से दूर हिमालचुली के बरफ वाला पहाड़ लउके ला जवन ओजी से 60-80 किलोमीटर दूर बा। आस पास की पेड़न पर संतरा खानी बाकिर छोट छोट फर रहे जवन साईत माल्टा रहे।

दर्शन क के आगे चलनी जा आ आगे जामुने में चाय नाश्ता खातिर रुकनी जा। ओजी चाय समोसा दबा के आगे बढ़नी जा आ जल्दिये पोखरा पहुँच गइनी जा। पोखरा पहुँच के फटाफट फेवा ताल की तीरे एगो होटल लियाइल आ तीनू बेकत सुत रहनी जा।
बरखा में लुकाएके जोगाड़

काठमांडू के पैनोरमिक व्यू

स्वयंभूनाथ स्तूप


माई-बेटा

बड़ा ठंढा बा







त्रिशूली नदी आ ऊपर पृथ्वी राजपथ

मनकामना देवी मंदिर

मंदिर की पीछे बरफ वाला पहाड़




चाय-समोसा के दोकान

रविवार, 7 जून 2015

काठमांडू घुमाई, नेपाल यात्रा : तिसरका दिन

रातीखान हडाहे बोखार ध लेले रहुवे जवन सबेरे ले तनी कम हो गउवे। अपना बोखार साल में एक रात खातिर होखबे करेला आ बे दवाई खइले उतर जाला। बाकिर ई ओमे के ना रहुवे! खैर तनीमनी बोखार खातिर पोरगराम बिगाडल नीमन ना रहुवे। चदरा लपेट के बिहाने बिहाने पशुपति नाथ पहुँज गवीं जा। पहिले गाडी ढंग से पार्किंग में लगवा के ओकरी बाद मंदिर की ओर बढवीं जा। ओजी से कवनो मेला उखरत रहुवे। चरखी झुलुहा कुल्ह लागल रहुए बाकिर चलत ना रहुवे। आ बेटी झुलुहा में बईठे के जिद करे लगुए। हम कबो छोट लइकन से झूठ ना बोलेनी आ सच्चाई समझे के उ तैयार ना रहुवे। हँ तs ओके मनावे में पाहि तs लागिये गउवे। मंदिर की बहरी एक जगहि कबूतरन के दाना डाले के बेवस्था रहुवे! हमार बेटी त देखते कबूतरन की बीच में दउर गउवे आ मलिकाइन हमार हाथ धs के आँख किचकिचा के मून लेहुवी। उ कबूतर से पता ना काहे डेराली। मन भर दउरला की बाद बेटी अउवे। बगल में नेपाल के हिंदू राष्ट्र घोषित करे खातिर हस्ताक्षर अभियान चलत रहुवे। मलिकाईन साइन करे पहुँच गवी त डटवीं की नेपाल केतनो मित्र देश होखे बाकिर ओकरी अंदरूनी मामला में हमनी का कुछु ना करे के चाहीं। ओकरीबाद परसादी ले के मंदिर में ढुकवीं जा। ढुकते सामनहीं पित्तर के बडके चुका नंदी बाडे! उनकी ठीक सामने मेन मंदिर बा! मंदिर में चारू ओर दुवारी बा बाकिर भीतर ढुके के परमीशन नईखे! चारू दुवारी से दर्शन कइले बिना दर्शन पूरा ना मनाला! चारू ओर से दर्शन कइला की बाद अगल बगल की देवता लो के दर्शन भउवे। पशुपति नाथ के एगो काथा बा। जब पाण्डव लो महाभारत जीत लीहल त कुल गुरू ओ लो से कहले की तहन लो की माथे अपनी परिवार की लोग की हत्या के पाप बा। जा के प्रायिश्चित क के आवs लो। त ऊ लो गुरू जी से पूछल लो की कराई के, गुरू जी बतवले की आतना बड़हन पाप के प्रायिश्चित शंकरे जी करा सकेले। अउरी केहू की बस के नईखे। पाण्डव लो निकलल लो शंकर जी के खोजे। जब शंकर जी ई जनले त  प्रायिश्चित करावे की डरे भाग चलले। पाण्डव लो उनका के खोजत हिमालय में घूमत रहे लो तले एगो भईंसा लउकल। अर्जुन चिन्ह गइले की ई शंकर भगवान हउवन। भीम के इशारा कईले की ध ले इनका के। भीम जब आगे बढ़ले त शंकर जी जमीन में ढुके लगले। भीम उनकर पोंछ ध के खूबे जोड़ से बहरा घींच लेहले। शंकर जी त बहरा आ गईले बाकिर झटका से भईंसा का मुड़ी टूट के दूर बिगा गईल। उहे जा के काठमांडू में गिरल। उहे पशुपति नाथ हउवन आ जवन भीम की हाथ में रहले ऊ केदारनाथ हो गईले। ओजी से निकलला की बाद नीलकंठ खातिर निकलवीं जा। रास्ता में एक जगहि नाश्ता करे रुकवीं जा। हमार त तबियत त खराबे रहुवे, आ डराउबरो के तबियत नरमाहे रहुवे। दोकनदारिन से कहवीं की दू गो अइसन नूडल सूप बनाउ कि मिजाज गरमा जाव। मलिकाइन ओजी के लोकल नाश्ता (चिउरा आ आलू के तरकारी) लेहवी। सूप त उ सही में अइसन बना देहुवे कि कान महें धुँआ निकले लगुवे। मजा आ गउवे। तले एगो बाबाजी एकतारा पर हनुमान चलीसा गावत अइले। हम कबो केहू के भीख ना देनी बाकिर उ एतना नीमन गावत रहुवन कि बिस गो रुपिया देइए देहवीं। नाश्ता क के पहुँचवींजा नीलकण्ठ। नाम से त ई शंकर जी के मंदिर बुझात रहुवे बाकिर रहुवे बिष्नु भगवान के। ओजी पानी की बीच में भगवान के शेषनाग पर सुतल मुर्ति बा। मंदिर की भीतर फोटो घींचल माना बा बाकिर अोकर कवनो तुक नईखे। मुर्ति की चारी ओर पाँच फुट के छरकी बा। हाथ तनी मनी उँचा क के बहरे से नीमन फोटो आ जाला। पूजा क के निकलवीं जा त झीसी परे लगुवे। वापस होटल खातिर निकल लेहवीं जा। गूगल मैप में देखवीं कि होटल की बगले में कैसर महल रहुवे। भउवे कि ईहो घुमले चलल जाव। आ के ओमे ढुक गवीं जा। ई एगो पार्क ह जवना में कइ गो नीमन नीमन रेस्टोरेंट-बार बा। ढुकला के टीकठ बीस रुपिया। बाकिर बनवले बा बहुत सुंदर। नीमन घास, अलग अलग डिजाइन के परगोला बा। बिच्चे में एगो एम्फीथियेटर बा। हमनी के भाग नीमन ना रहुवे काहे से कि ओजी ले पहुँचत पहुँचत झीसी बरियार हो गइल रहुवे। बाकिर पार्कवा आला छाता के बेवस्था रखले रहुवsसन। एकहs गो छाता ले के हमनी का झिसिये में घुमवीं जा। एगो कोना में लक्ष्मी जी के एगो अलगे डिजाईन का मुर्ति रहुवे। गाउन पहिरले, एक हाथ में कमल आ दुसरका में से पईसा झहरावत। लगे जा के डिटेल पढवीं त पता चलुवे कि ऊ यूनान के पइसा के देबी आ भारत की लक्ष्मी जी के मिला के बनावल गईल बा। जब घुम के मिजाज थाक गउवे त आके होटल में एक घंटा आराम करवीं जा आ ओकरी बाद दरबार चौक घूमे निकल लेहवीं जा। अब त ओजी कुछऊ नईखे बचल। भूकंप सभ ले बीतल।  सबसे पहिले एगो बाँस गाड़ल बा आ ओपर तीन गो लोहा के गोला लगा के ओपर रंग बिरंग कपड़ा बान्हल बा। हम कई आदमी के ओकर पूजा करत देखवीं एसे अंदाज लगुवे कि ऊ कवनो देवता के धाजा हs। ओकरी आगे बढ़ला पर बांयाँ ओर कुमारी देवी के मंदिर बा। शाक्य ब्राह्मण लो अपना में से कवनो छोट लईकी के देवी चुनेला लो आ ऊ देवी ए मंदिर में रहेली। पुरा दरबार चौक पर ईहे एगो मकान भूकंप से बचल बा। लोग एके देवी के महिमा मानsता। ओकरी आगे काष्ठमंडप रहुवे(अब नईखे), दरबार चौक के शान। एकरे नाम पर शहर के नाम काठमांडू परल बा। रेक्सा ले के पूरा चौक हड़हेरवीं जा। ओजी के लोकल मिठाई खवीं जा। कुल्ही मिठाई अपनी ईहाँ कि मिठइयन खानी रहुवे। टिकरी, खाजा, पेड़ुकिया खानी। ओकरी बाद गाड़ी में बईठवीं जा आ वापस अपनी होटल। अगिला दिने का फेर कबो।
होटल की बहरी

पशुपतिनाथ की बहरा, कबूतर उड़ खेलत।

मंदिर की में गेट की सामने

मंदिर के दुवारी, सामने नंदी जी लउकतारे

हनुमान चलीसा वाला बाबा जी

नीलकण्ठ भगवान

कैसर महल में

लक्ष्मी जी

परगोला पर बाप बेटी

एम्फीथियेटर

बरखा में मस्ती

हई मलाई के खाई

रेस्टोरेंट की बहरा

दरबार चौक

कुमारी देवी मंदिर की दुआरी पर के डिजाइन

मंदिर की भीतर

मंदिर की बाहर से

नेपाल की झंडा की संगे, पीछे काष्ठमंडप ह।

दरबार चौक पर के धाजा